(अध्याय 3) टूटा चाँद ! आर्यन के जन्मदिन की मेहमानों की लिस्ट बन गई थी। उसके दोस्तों के साथ शहर की सभी माननीय हस्तियाँ तो थीं ही, बाहर से भी कई लोग बुलाये गये थे। मेरे अपने मेहमान तो उँगली पर गिनने लायक ही थे। मुझे बच्चों के फँक्शन में बड़ों का इतना बड़ा जमावड़ा समझ में नहीं आता है, लेकिन उससे क्या फ़र्क पड़ना था। घर में कुछ नहीं करना था, सब कुछ कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया गया था और हमें तैयार होके बस शामिल भर हो जाना था। आजकल तो ये आम बात हो गई है लेकिन उस समय इसका प्रचलन नहीं था, वो भी इलाहाबाद जैसे छोटे शहरों में। इसमें मुझे कभी संतो...
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(अध्याय 1) प्रशस्ति-यात्रा 20 साल पूर्व... आज बहुत अनमनी सी हूँ,बाहर आसमान पर घने जामुनी बादल छाये हैं लेकिन हमेशा की तरह ये मन को खुश नहीं कर रहे बल्कि डिप्रेस कर रहे हैं। नर्सिंग होम में कोई ख़ास काम नहीं है मेरा,कोई डिलीवरी ,कोई c section कुछ नहीं,इस लिये कुछ राहत है। ये मौसम हमेशा मन को मगन करता रहा है,लेकिन आज पता नहीं क्यों तन-मन दोनों ढीले हैं। पता नहीं कहना शायद ग़लत होगा क्योंकि मैं भी जानती हूँ कि जीवन की भागदौड़ और उलझनों का सीधा असर मन पर पड़ता है और मेरे जीवन में अब सुकून की बेहद कमी है। ज़ाहिर तौर पे इज़्ज़त,शोहरत और दौलत किसी चीज़ की कोई कमी नहीं,बल्कि यूँ कहें कि ये सब बेशुमार हैं तो कुछ ग़लत ...